۞ وَلَوْ يُعَجِّلُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ ٱلشَّرَّ ٱسْتِعْجَالَهُم بِٱلْخَيْرِ لَقُضِىَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ ٱلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَآءَنَا فِى طُغْيَٰنِهِمْ يَعْمَهُونَ
और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरग़िरदा रहें
यदि पवित्र अल्लाह लोगों के क्रोधित होने पर ख़ुद अपने, अपने बच्चों और अपने धन पर बद-दुआ (शाप) को उसी तरह जल्दी क़बूल कर ले, जिस तरह उनकी भलाई की दुआओं को स्वीकार करता है - तो वे नष्ट हो जाएँ। लेकिन अल्लाह उन्हें ढील देता है। अतः वह उन लोगों को, जो उससे मिलने की प्रतीक्षा नहीं करते (क्योंकि उन्हें न किसी दंड का भय होता है और न सवाब की आशा होती है) हिसाब के दिन के बारे में भ्रमित, चकित और शंकित छोड़ देता है।