قُلِ ٱنظُرُوا۟ مَاذَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَمَا تُغْنِى ٱلْءَايَٰتُ وَٱلنُّذُرُ عَن قَوْمٍۢ لَّا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
(ऐ रसूल!) आप उन मुश्रिकों से, जो आपसे निशानियों का प्रश्न करते हैं, कह दें : विचार करो कि आकाशों और धरती में अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसकी शक्ति को इंगित करने वाली क्या-क्या निशानियाँ हैं। जो लोग, अविश्वास पर अपने हठ के कारण, ईमान लाने को तैयार नहीं हैं, उन्हें निशानियों, तर्कों और संदेशवाहकों का उतारना कोई लाभ नहीं देता।